Wednesday, September 24, 2008

gazal

और जब जहन में आ गए कई सवाल
तो हमने कहा के सुनो........... कतार में रहो

अच्छे भले हो आदमी आँखें खुली रखो
यूँ खाम्ख्वा के मत किसी खुमार में रहो

तेरे बदन पे तिल कहाँ हैं जानते हैं हम
अब तुम हमारे काले कारोबार में रहो

सारे गुनाह खिल के तो गुलाब हो गए
अब आज से काँटों के अख्तियार में रहो

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